रील-अँगूठा-छाप सवैया-चतुष्टयी


​१. (पठन-संस्कृति से भागते लोग)



​कामन धामन छोड़िन छोड़िन, बैठत ठेंगन दाबहि लागे।


पूछत पूछत थाकहि हाँफत, छंदन देखहु बोलत भागे॥


व्यस्त अभी हम पस्त अभी हम, काम बड़ो है कह-कह टारे।


लौट गये हम बातन बूझत, रीलन भूतन चापन सारे॥






​२. (व्यावसायिक खोखलापन एवं बौद्धिक पतन)



​दाबहि ठेंगन रीलन वालन, माल कमावत ढेरन रोजे।


भोरन रैनन खाँपहि खाँपहि, छंदन राचन हम भी सोझे॥


लोगन जोगन लागहि कैसन, लेखन पाठन भूल रयो है।


भाव नहीं अब भान नहीं अब, ज्ञानहि गोबर साफ भयो है॥






​३. (आभासी रिश्ते और डिजिटल दुर्घटनाएँ)



​रीलन खातिर लोगन आजन, जानहि देखहि झोंक दियो है।


भूलहि भूलहि आपन लोगन, रिश्ता यंतर बनाय लियो है॥


नाचहि नाचहि रेलन पाटर, जानन खोइन शोक दियो है।


जानहि देखहि नाहिन जाहिन, आपन जैसन मान गयो है॥






​४. (धैर्यहीनता एवं बौद्धिक सहिष्णुता का अभाव)



​लेखन बारन बोलत लोगन, कैसहि देखहु इतना लंबा।


चैनन नैनन खोइ रहे अब, रीलन ताड़हि वे अवलंबा॥


पागल जागल नींदहि खोवत, भोगत कैसन आजन रोगा।


पाठत वाचत लेखन में अब, पीड़ित होवत काहु न लोगा॥





श्रम का महत्व:भूल गया इनसान

श्रम का महत्व:Images

महत्व श्रम का सुनेंं,उसे कर्म मानिए!

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कर्म का मर्म को हमें समझना होगा।

  • श्रम साध्य उत्तम मार्ग प्राप्ति!
  • श्रम मार्ग जीवन सदा उदारता!

कर्म ही भाग्य सुधारक

  • श्रमसाध्य कर भाग्य उत्थान!
  • कर्म से ही जग में अभ्युत्थान

श्रम के महत्व को समझकर ही सफलता के मार्ग के प्रथम सोपान पर आरुढ़ हुआ जा सकता है। व्यक्ति,समष्टि या प्रकृति कोई भी श्रम से अनभिज्ञ नहीं। सभी ने श्रम को समझा और इसके महत्व को जाना पहचाना।

जिसने भी इसके महत्व को अस्वीकारा,
वह अँधकार के
अनंत गह्वर में जा पहुँचा और इस संसार से विलुप्त हुआ मानो।

समय चाक को नियंत्रित गति से
घूर्णन हेतु श्रमरूपी हाथ की आवश्यकता पड़ती है।

  1. श्रम साध्य जीवन
  2. कर्म ही भाग्य बनाए

Bhavnaon ki lalten

भावनाओं की लालटेन!

भावनाओं की लालटेन!

अंतसव्यथा

मन क्रंदन,मनसा क्रंदन। या भावनाओं का स्पंदन! कुटुम्ब जन की व्यथाएँ, आत्मिक मनोभाव का दर्शन।

अंतस पीड़ा,काटे ज्यों कीड़ा। चुभता फूल, बनके शूल! वेदनाएँ चीखती,अंतस भटकती!

मनसा स्पंदन

मनसा स्पंदन भावनाओं का आलिंगन

देखिए,भानिये व्यथाएँ !
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रील-अँगूठा-छाप सवैया-चतुष्टयी

​१. (पठन-संस्कृति से भागते लोग) ​कामन धामन छोड़िन छोड़िन, बैठत ठेंगन दाबहि लागे। पूछत पूछत थाकहि हाँफत, छंदन देखहु बोलत भागे॥ व्यस्त अभी हम ...